औरैया: नौतपा की चिलचिलाती धूप और भीषण उमस के बीच औरैया जिले में सेवा भाव का एक बेहतरीन उदाहरण देखने को मिला। शहर के प्रमुख समाजसेवी संगठन ‘एक विचित्र पहल सेवा समिति’ के तत्वावधान में एक विशाल शरबत वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह पुनीत कार्य समिति के अध्यक्ष राजीव पोरवाल (रानू) के नेतृत्व में उनकी दिवंगत माता श्रीमती प्रभादेवी पोरवाल की पुण्य स्मृति में संपन्न हुआ।
दिबियापुर रोड पर सैकड़ों लोगों ने पीया रुह-अफजा शरबत
शहर के दिबियापुर रोड स्थित ‘श्री भगवान एंड संस’ प्रतिष्ठान पर आयोजित इस कार्यक्रम में राहगीरों को रोक-रोक कर ठंडा रुह-अफजा शरबत पिलाया गया। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच ठंडे शरबत ने लोगों के गले को तर कर बड़ी राहत पहुंचाई।

इस सेवा कार्य का लाभ समाज के हर वर्ग को मिला। खासकर दिनभर धूप में मेहनत करने वाले ऑटो और ई-रिक्शा चालक, सड़क किनारे दुकान लगाने वाले, फल-सब्जी विक्रेता, पैदल चलने वाली महिलाएं और छोटे बच्चों ने शरबत पीकर राहत की सांस ली।
बुजुर्गों के संस्कार ही जीवन की सच्ची पूंजी: भगवान पोरवाल
इस मौके पर समिति के संरक्षक भगवान पोरवाल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए सेवा और संस्कारों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा,
“हमारे बुजुर्गों के दिए गए संस्कार और उनका आशीर्वाद ही हमारे जीवन की सबसे बड़ी और सच्ची पूंजी है। उनकी याद में समाज सेवा के ऐसे कार्य करना ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है।”
बुजुर्गों की स्मृति में लगाएं पौधे: आनन्द नाथ गुप्ता
‘एक विचित्र पहल सेवा समिति’ के संस्थापक आनन्द नाथ गुप्ता (एडवोकेट) ने इस अवसर पर आम जनमानस से एक विशेष और पर्यावरण हितैषी अपील की। उन्होंने कहा कि हमें अपने बुजुर्गों की पुण्यतिथि और स्मृति में अधिक से अधिक पौधारोपण करना चाहिए। इससे न केवल पर्यावरण का संरक्षण होगा, बल्कि हमारे बुजुर्गों की यादें भी समाज में हमेशा एक छायादार और फलदार वृक्ष की तरह जीवंत रहेंगी।
समाजसेवियों और व्यापारियों का मिला भरपूर साथ
इस सराहनीय सेवा कार्य में समाजसेवियों, स्थानीय व्यापारियों और समिति की महिला शाखा के पदाधिकारियों ने भी बढ़-चढ़कर अपना योगदान दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद गणमान्य लोगों ने अपने हाथों से राहगीरों को शरबत वितरित किया।
चिलचिलाती गर्मी के बीच हुए इस आयोजन की आम जनता और राहगीरों ने जमकर सराहना की। इस कार्यक्रम ने पूरे समाज को एक स्पष्ट और सकारात्मक संदेश दिया है— “अपने बुजुर्गों की स्मृतियों को सेवा और अच्छे संस्कारों के माध्यम से सदैव जीवित रखें।”

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