औरैया: शहर के सबसे व्यस्त और प्रमुख चौराहों में शुमार ‘संजय गेट’ पर शाम ढलते ही यातायात व्यवस्था पूरी तरह से बेपटरी हो जाती है। यहां रोजाना लगने वाला लंबा और भीषण जाम शहर की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था की सरेआम पोल खोल रहा है। उमस भरी गर्मी के बीच इस जाम में फंसकर दोपहिया, चार पहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों के पसीने छूट रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे बैठे हैं।
अतिक्रमण और अवैध पार्किंग ने किया सड़क को संकरा
संजय गेट पर लगने वाले इस भयंकर जाम का सबसे बड़ा कारण सड़क किनारे फैला अतिक्रमण है। संजय गेट के आसपास के फुटपाथों और सड़क पर शाम होते ही फास्ट फूड (चाऊमीन, मोमोज आदि) की ठेले, खोमचे और अन्य अस्थायी दुकानें सज जाती हैं। इसके चलते मुख्य मार्ग बेहद संकरा हो जाता है।

बची-खुची कसर अव्यवस्थित पार्किंग पूरी कर देती है। खरीदारी करने आने वाले लोग अपने वाहन (बाइक्स और कारें) सड़क के किनारे आड़े-तिरछे खड़े कर देते हैं, जिससे वहां से दूसरे वाहनों का निकलना लगभग नामुमकिन हो जाता है और देखते ही देखते वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं।
पीक आवर्स में नदारद रहती है ट्रैफिक पुलिस
इस भीषण जाम के बीच ट्रैफिक पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। स्थानीय लोगों और राहगीरों का आरोप है कि जब शाम के समय ट्रैफिक का दबाव सबसे अधिक होता है, तब यातायात को सुचारू रूप से चलाने के लिए मौके पर कोई भी ट्रैफिक पुलिसकर्मी या होमगार्ड मौजूद नहीं रहता है। वाहन चालक खुद ही एक-दूसरे से उलझकर आगे निकलने की होड़ में जाम को और अधिक जटिल बना देते हैं।
आमजन से लेकर व्यापारी तक बेहाल
रोजाना लगने वाले इस जाम से न केवल राहगीर बल्कि आम जनता, स्कूली बच्चे और स्थानीय व्यापारी भी भारी परेशानी झेल रहे हैं। शाम को दफ्तरों से घर लौटने वाले कर्मचारियों को मिनटों का रास्ता तय करने में घंटों लग जाते हैं। जाम के कारण कई बार एंबुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों के भी फंसने की स्थिति बन जाती है, जो किसी बड़े खतरे का संकेत है।
प्रशासन से व्यवस्था सुधारने की मांग
संजय गेट पर रोज-रोज की इस फजीहत से तंग आकर अब स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने जिला व पुलिस प्रशासन से कड़े कदम उठाने की मांग की है। लोगों ने मांग की है कि:
- संजय गेट के आसपास सड़क घेरकर लगाई जाने वाली अस्थायी दुकानों और अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाए।
- शाम के समय यहां नियमित रूप से ट्रैफिक पुलिस के जवानों की तैनाती की जाए।
- बेतरतीब वाहन खड़े करने वालों के खिलाफ चालान की सख्त कार्रवाई हो।
अब देखना यह है कि प्रशासन और ट्रैफिक महकमा इस समस्या का संज्ञान लेकर शहरवासियों को इस ‘जाम के झाम’ से कब तक निजात दिलाता है।

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