औरैया : उप जिलाधिकारी (SDM) की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ सदर तहसील में चल रहा अधिवक्ताओं का धरना-प्रदर्शन अब उग्र रूप लेता जा रहा है। अपनी मांगों को लेकर अड़े अधिवक्ताओं ने उप जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और शासन-प्रशासन के खिलाफ अपनी भड़ास निकाली। आंदोलन को अब राजनीतिक दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का भी खुला समर्थन मिलने लगा है, जिससे यह लड़ाई आर-पार की स्थिति में पहुंच गई है।
“SDM और जिला प्रशासन मुर्दाबाद” के नारों से गूंजा परिसर
लंबे समय से हड़ताल पर बैठे वकीलों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। आक्रोशित अधिवक्ताओं ने एसडीएम कार्यालय का घेराव करते हुए वहां जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान तहसील परिसर “SDM सदर मुर्दाबाद”, “जिला प्रशासन मुर्दाबाद” और “भ्रष्ट प्रशासन मुर्दाबाद” के नारों से गूंज उठा। अधिवक्ताओं ने प्रशासनिक कार्यशैली पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि अधिकारियों की हठधर्मिता के कारण आम जनता और वादकारियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

2027 के विधानसभा चुनाव में BJP को सबक सिखाने की चेतावनी
इस प्रदर्शन में अधिवक्ताओं का गुस्सा सीधे तौर पर सत्ताधारी दल पर भी फूटा। वकीलों ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया और भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगा, तो अधिवक्ता समाज एकजुट होकर 2027 के आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सबक सिखाने का काम करेगा।
हड़ताल से अब तक 15 करोड़ के राजस्व का भारी नुकसान
अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों ने दावा किया है कि वकीलों की इस कलमबंद हड़ताल के कारण तहसील के सभी महत्वपूर्ण कार्य पूरी तरह से ठप पड़े हैं। बैनामा (रजिस्ट्री) और अन्य राजस्व न्यायालयों के कार्य न होने से सरकारी खजाने को अब तक लगभग 15 करोड़ रुपये के राजस्व का भारी नुकसान हो चुका है। इसके बावजूद, प्रशासन अपनी जिद पर अड़ा है और अधिवक्ताओं की जायज मांगों की लगातार अनदेखी कर रहा है।
सोमवार से और व्यापक होगा आंदोलन, किसान यूनियन भी उतरेगी मैदान में
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सुशील पांडे और तहसील महामंत्री हरिभानु अवस्थी के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में सैकड़ों अधिवक्ताओं ने हिस्सा लिया। पदाधिकारियों ने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि:
- एसडीएम का स्थानांतरण अनिवार्य: जब तक एसडीएम सदर का यहां से स्थानांतरण (तबादला) नहीं हो जाता, तब तक यह अनवरत धरना जारी रहेगा।
- सोमवार से कार्यालय के बाहर डेरा: वकीलों ने चेतावनी दी है कि सोमवार से वे एसडीएम कार्यालय के ठीक बाहर बैठकर अपने आंदोलन को और अधिक तेज करेंगे।
- किसान यूनियन का समर्थन: अधिवक्ताओं के इस संघर्ष को अब जनपद के विभिन्न व्यापारिक संगठनों, समाजवादी पार्टी (SP) और सामाजिक संगठनों का साथ मिल चुका है। वहीं, अधिवक्ताओं ने बताया कि सोमवार को ‘भारतीय किसान यूनियन’ (Bhartiya Kisan Union) के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी उनके समर्थन में आंदोलन में शामिल होंगे।
किसानों के इस आंदोलन में जुड़ने से यह प्रदर्शन और अधिक व्यापक और उग्र होने की संभावना है। ऐसे में अब पूरी निगाहें जिला प्रशासन और शासन पर टिकी हैं कि वे इस बड़े होते जनांदोलन को शांत करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
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