औरैया : उत्तर प्रदेश की राजनीति में औरैया जिला अब सिर्फ एक क्षेत्रीय नाम नहीं रह गया है, बल्कि यह सियासत के एक बेहद मजबूत और निर्णायक केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को देखें तो साफ नजर आता है कि प्रदेश के दो सबसे बड़े और प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी महिला मोर्चा और महिला सभा की कमान औरैया की ही कद्दावर नेत्रियों के हाथों में सौंप दी है। यह महज एक संयोग नहीं है, बल्कि जिले के लगातार बढ़ते राजनीतिक कद और ‘आधी आबादी’ (महिला मतदाताओं) को साधने की एक सोची-समझी राजनीतिक बिसात है। औरैया सही मायनों में अब यूपी की राजनीति में “महिला नेतृत्व की प्रयोगशाला” बन चुका है।


सत्ता और संगठन में गीता शाक्य की मजबूत पकड़
सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) की बात करें, तो यहां औरैया का दबदबा स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। पार्टी ने गीता शाक्य को महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष की अहम जिम्मेदारी सौंप रखी है। गीता शाक्य केवल संगठन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एक राज्यसभा सांसद के तौर पर वह सत्ता और संगठन दोनों ही मोर्चों पर अपनी बेहद मजबूत पकड़ रखती हैं।
उनके नेतृत्व और अनुभव के जरिए पार्टी का मुख्य फोकस प्रदेश भर की महिला मतदाताओं को सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी और महिला सशक्तिकरण योजनाओं से जोड़कर एक अभेद्य वोट बैंक तैयार करना है।
रुक्मणि निषाद के जरिए सपा का ‘पिछड़ा और महिला’ कार्ड
वहीं दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (SP) ने भी औरैया के इसी सियासी महत्व को बखूबी भुनाते हुए अपनी रणनीति तैयार की है। सपा ने रुक्मणि निषाद को अपनी महिला सभा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर एक बड़ा सियासी दांव चला है। रुक्मणि निषाद का सीधा पारिवारिक संबंध पूर्व सांसद स्व. फूलन देवी से होना, उन्हें सियासत में एक अलग पहचान और एक बेहद खास राजनीतिक आधार प्रदान करता है।


उनके नेतृत्व के जरिए समाजवादी पार्टी की नजर मुख्य रूप से प्रदेश के पिछड़ा वर्ग (OBC) और विशेषकर उस महिला वोट बैंक को अपने पक्ष में लामबंद करने पर है, जो चुनाव में हार-जीत का अंतर तय करता है।
आगामी चुनावों में तय होगा जमीनी जनाधार
दोनों ही प्रमुख दलों की राजनीतिक रणनीति बिल्कुल साफ और पारदर्शी है— प्रदेश की करोड़ों महिला मतदाताओं को साधने के लिए औरैया की इन तेजतर्रार महिला नेताओं को आगे किया जा रहा है। अब आगामी चुनावों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि किस नेत्री की सांगठनिक पकड़ जमीनी स्तर पर ज्यादा मजबूत साबित होती है और किसे महिलाओं का सबसे अधिक समर्थन व आशीर्वाद मिलता है।
यह बात पूरी तरह से तय है कि औरैया की इस सियासी प्रयोगशाला से जो भी चुनावी नतीजे और रुझान निकलेंगे, वे आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के कई बड़े राजनीतिक समीकरणों की दिशा तय करेंगे।


‘Auraiya Times’ यह मानता है कि औरैया जनपद के लिए यह एक बेहद गौरव का विषय है कि जिले की महिलाएं प्रदेश स्तर की राजनीति में नेतृत्वकर्ता की मुख्य भूमिका निभा रही हैं। राजनीतिक विचारधारा चाहे जो भी हो, लेकिन महिलाओं का इस तरह निर्णय लेने वाले उच्च पदों पर पहुंचना और मुख्यधारा की राजनीति में सशक्त होना, हमारे लोकतंत्र और समाज दोनों के लिए एक बहुत ही शुभ संकेत है।
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