लखनऊ/औरैया: भीषण गर्मी, बिजली की बढ़ती खपत और हर महीने आने वाले भारी-भरकम बिजली बिलों के बीच आम आदमी से लेकर सरकार तक का पूरा ध्यान अब ‘सौर ऊर्जा’ (Solar Energy) पर केंद्रित हो गया है। कोयले पर निर्भरता कम करने और आम लोगों को बिजली बिलों से स्थायी निजात दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। खाली पड़े सरकारी भवनों, किसानों के खेतों से लेकर आम आदमी के घरों की छतों तक सोलर पैनल स्थापित करने का अभियान तेजी पकड़ चुका है। प्रदेश सरकार ने अपनी ‘सौर ऊर्जा नीति-2022’ के तहत वर्ष 2026-27 तक 22,000 मेगावाट (22 गीगावाट) सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके परिणाम अब जमीनी स्तर पर दिखने लगे हैं।


आम घरों के लिए वरदान साबित हो रही ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के घरेलू उपभोक्ताओं को सौर ऊर्जा से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार की ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ सबसे कारगर पहल साबित हो रही है। इस योजना के तहत उपभोक्ताओं को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ मिल रहा है। इसके लिए लोगों को अपने घर की छत पर सोलर पैनल (रेशिडेंशियल रूफटॉप सोलर) लगवाना होता है। शासन की ओर से इसके लिए सीधी आर्थिक सहायता (सब्सिडी) सीधे उपभोक्ता के बैंक खाते में भेजी जा रही है। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए आवेदन ‘नेशनल पोर्टल’ (pmsuryaghar.gov.in) के माध्यम से ऑनलाइन लिए जा रहे हैं।
कितनी आएगी लागत और कितनी मिलेगी सब्सिडी? (समझें पूरा गणित)
आम उपभोक्ताओं के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि सोलर पैनल लगवाने में कितना खर्च आएगा और सरकार की ओर से कितनी मदद मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, एक सामान्य परिवार की जरूरत के लिए 1 से 3 किलोवाट तक का सिस्टम पर्याप्त होता है। सरकार ने इसके लिए सब्सिडी का स्लैब तय किया है:
सोलर पैनल लागत और सब्सिडी अनुमान (Table):


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