औरैया: जिले में बिजली विभाग की लापरवाही और ग्रामीण उपभोक्ताओं की शिकायतों को ‘ठंडे बस्ते’ में डालने वाले रवैये पर न्यायपालिका ने कड़ा हंटर चलाया है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, औरैया ने एक ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाते हुए बिजली विभाग को ‘सेवा में कमी’ का मुख्य दोषी ठहराया है और एक गरीब बुजुर्ग किसान को हुए नुकसान की भरपाई के लिए 45 दिनों के भीतर मुआवजा देने का आदेश जारी किया है।
इस पूरी विधिक लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने का श्रेय वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव पाण्डेय को जाता है, जिन्होंने पीड़ित किसान की ओर से न्यायालय में सशक्त पैरवी की।

क्या था पूरा मामला? झोपड़ी में लगी थी भीषण आग
यह पूरा मामला अजीतमल तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम बबाइन (अनुरूद्ध नगर) से जुड़ा है। यहां के रहने वाले 74 वर्षीय बुजुर्ग किसान बृजबिहारी की झोपड़ी के पास से एक हाईटेंशन विद्युत लाइन गुजर रही है।
घटनाक्रम के अनुसार, 19 जून 2024 की सुबह करीब 6:30 बजे अचानक इस हाईटेंशन लाइन में भयंकर स्पार्किंग और शॉर्ट-सर्किट हुआ। इससे निकली चिंगारियों से बुजुर्ग की झोपड़ी में भीषण आग लग गई। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि झोपड़ी के भीतर बंधे किसान के मवेशियों को बाहर निकालने का मौका ही नहीं मिला। इस दर्दनाक हादसे में तीन बकरियां और एक बकरा (कुल 4 मवेशी) मौके पर ही जिंदा जल गए।
शिकायतों को किया गया था अनदेखा, वकील ने लड़ी कानूनी लड़ाई
वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव पाण्डेय ने बताया कि पीड़ित वृद्ध ने घटना से पूर्व भी विद्युत पोल पर होने वाली स्पार्किंग और जर्जर तारों की शिकायत स्थानीय विभागीय अधिकारियों से की थी। लेकिन, बिजली विभाग की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता के कारण तारों की कोई मरम्मत नहीं की गई, जिसका नतीजा इस भयानक हादसे के रूप में सामने आया।
अधिवक्ता द्वारा न्यायालय में पोस्टमार्टम आख्या, तहसीलदार अजीतमल की जांच रिपोर्ट और घटना स्थल के छायाचित्र (Photos) ठोस साक्ष्यों के रूप में प्रस्तुत किए गए।
उपभोक्ता आयोग का सख्त फैसला: 45 दिन का अल्टीमेटम
सभी साक्ष्यों का गहनता से अवलोकन करने के बाद, उपभोक्ता आयोग के माननीय अध्यक्ष श्री जगन्नाथ मिश्र एवं सदस्य श्री जितेन्द्र सिंह कुशवाह की पीठ ने बिजली विभाग (अधिशाषी अभियंता, विद्युत वितरण खण्ड औरैया) को सख्त आदेश जारी किए हैं:

- मुआवजा राशि: अदालत ने पीड़ित बुजुर्ग को मवेशियों और झोपड़ी के नुकसान की भरपाई के लिए कुल 50,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।
- ब्याज: यह पूरी मुआवजा राशि परिवाद (केस) दायर करने की तिथि से लेकर वास्तविक अदायगी के दिन तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ देय होगी।
- मानसिक कष्ट व कानूनी खर्च: उपभोक्ता अदालत ने बुजुर्ग को हुए मानसिक-शारीरिक कष्ट के लिए 2,500 रुपये और विधिक वाद व्यय (कानूनी खर्च) के रूप में 2,500 रुपये अतिरिक्त चुकाने का भी आदेश दिया है।
- समय सीमा: बिजली विभाग को यह पूरी धनराशि निर्णय की तारीख से 45 दिनों के भीतर पीड़ित को सौंपनी होगी।

वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव पाण्डेय ने सोशल मीडिया और वेब पोर्टल्स के माध्यम से इस फैसले की जानकारी साझा करते हुए इसे गरीब और शोषित उपभोक्ताओं के अधिकारों की एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक जीत बताया है। इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनसमस्याओं को रद्दी में फेंकने वाले अधिकारियों को अंततः कानून के सामने जवाबदेह होना ही पड़ेगा।
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