औरैया: जिले की सदर तहसील में प्रशासनिक अधिकारियों और राजस्व अधिवक्ताओं के बीच चल रहा गतिरोध अब एक बड़े और निर्णायक आंदोलन का रूप धारण कर चुका है। स्थानीय तहसील प्रशासन की कथित मनमानी, व्याप्त भ्रष्टाचार और अपनी 10 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर ‘राजस्व अधिवक्ता एसोसिएशन, औरैया’ का कार्य बहिष्कार शनिवार को 13वें दिन भी पूरी दृढ़ता के साथ जारी रहा।


लगातार दो सप्ताह से चल रहे इस शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद जब प्रशासनिक स्तर पर वार्ता की कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो आक्रोशित अधिवक्ताओं ने अपने आंदोलन को नई धार देते हुए शनिवार से तहसील परिसर में ‘क्रमिक अनशन’ (Sequential Fast) का बिगुल फूंक दिया। वकीलों के इस कड़े रुख के कारण कलेक्ट्रेट, तहसील और उप-निबंधक (रजिस्ट्री) कार्यालय का पूरा सिस्टम चरमरा गया है।

बैनामा और राजस्व न्यायालयों में पसरा सन्नाटा, बेहाल हो रही जनता
11 मई 2026 से चल रही इस बेमियादी ‘कलमबंद’ हड़ताल का सबसे ज्यादा खामियाजा आम जनता और किसानों को भुगतना पड़ रहा है। उप-निबंधक कार्यालय में जमीनों की खरीद-फरोख्त से जुड़े ‘बैनामे’ (Registry) पूरी तरह से बंद हैं। लाखों रुपये का राजस्व प्रतिदिन प्रभावित हो रहा है।
दूसरी ओर, उप जिलाधिकारी (SDM), तहसीलदार और नायब तहसीलदार के न्यायालयों में कामकाज शून्य है। दाखिल-खारिज, मेड़बंदी, पैमाइश, और भूमि विवाद से जुड़े महत्वपूर्ण मुकदमों की सुनवाई ठप पड़ी है। चिलचिलाती धूप में दूर-दराज के गांवों से न्याय की आस में तहसील पहुंचने वाले वादकारियों को केवल ‘अगली तारीख’ का पर्चा थमाकर मायूस लौटना पड़ रहा है।


आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार: 5 वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने शुरू किया अनशन
शनिवार को राजस्व अधिवक्ता एसोसिएशन की बैठक के बाद सर्वसम्मति से क्रमिक अनशन शुरू करने का निर्णय लिया गया। प्रशासन पर दबाव बनाने और अपनी मांगों को मजबूती से रखने के लिए पहले दिन एसोसिएशन के पांच वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने क्रमिक अनशन शुरू किया। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- श्री ज्ञानेंद्र मोहन तिवारी (एडवोकेट)
- श्री देवेंद्र नाथ उपाध्याय (एडवोकेट)
- श्री राजवीर सिंह पाल (एडवोकेट)
- श्री राजेश दीक्षित (एडवोकेट)
- श्री अरविंद तिवारी (एडवोकेट)
“गहरी नींद में है प्रशासन, मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा संघर्ष”
आंदोलन की रूपरेखा पर बात करते हुए राजस्व अधिवक्ता एसोसिएशन के महामंत्री हरिभानु अवस्थी (एडवोकेट) ने प्रशासन की कार्यशैली पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा-
“हम बीते 11 मई से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी 10 सूत्रीय जायज मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। हमने बैनामा और न्यायिक कार्यों का पूर्ण बहिष्कार कर रखा है, लेकिन प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है। हमारे क्रमिक अनशन का उद्देश्य इस सोए हुए तंत्र को जगाना है। जब तक तहसील को भ्रष्टाचार मुक्त करने और हमारी सभी मांगों पर लिखित सहमति नहीं बनती, तब तक यह अनशन और हड़ताल अनवरत जारी रहेगी।”
क्या हैं अधिवक्ताओं की 10 सूत्रीय प्रमुख मांगें?
अधिवक्ताओं का यह आंदोलन मुख्य रूप से तहसील स्तर पर व्याप्त ‘सुविधा शुल्क’ (भ्रष्टाचार), फाइलों के मनमाने निस्तारण और विभागीय तानाशाही के खिलाफ है। एसोसिएशन ने प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित 10 प्रमुख बिंदु रखे हैं:


- समयबद्ध पंजीकरण: धारा 116 और दाखिल-खारिज के मुकदमों को बिना किसी अनावश्यक देरी के तुरंत दर्ज किया जाए।
- पारदर्शी व्यवस्था: खतौनी पर दाखिल-खारिज के आदेश (परवाने) अंकित करने की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का ‘सुविधा शुल्क’ न लिया जाए।
- रिकॉर्ड रूम की सुगमता: तहसील परिसर स्थित रिकॉर्ड रूम को प्रतिदिन खोला जाए, जिससे मुआयना करने में अधिवक्ताओं को बाधा न आए।
- भ्रष्ट लेखपालों पर कड़ी कार्रवाई: अवैध वसूली और भ्रष्टाचार की शिकायतों से घिरे लेखपालों (विशेष रूप से अगम तिवारी व चित्रेश) को तुरंत पेशकारी से हटाकर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
- अविवादित फाइलों का त्वरित निस्तारण: राजस्व न्यायालयों में चल रही उन सभी अविवादित फाइलों में तुरंत आदेश पारित किए जाएं, जिन्हें बिना कारण लटका कर रखा गया है।
- कुरा दाखिल प्रक्रिया में सुधार: मेड़बंदी के मुकदमों में लेखपालों पर ‘कुरा दाखिल’ न करने का दबाव न बनाया जाए और सक्षम अधिकारियों द्वारा फाइलों को मनमाने ढंग से खारिज करने की प्रवृत्ति पर रोक लगे।
- जमानत प्रक्रिया का सरलीकरण: शांति भंग (धारा 151) में चालान होकर आने वाले व्यक्तियों को बिना कारण रात 10 बजे तक बैठाकर मानसिक प्रताड़ना देने और अवैध वसूली की प्रथा तत्काल बंद हो।
- ऑनलाइन फाइलों की पारदर्शी सुनवाई: रजिस्ट्री ऑफिस से तहसीलदार पोर्टल पर आने वाले मामलों को साक्ष्य व सुनवाई के बिना मनमाने ढंग से निरस्त न किया जाए।
- उप-निबंधक कार्यालय का स्थानांतरण: उप-निबंधक (रजिस्ट्री) कार्यालय को तहसील से दूर ग्राम सुरान में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध। वकीलों की मांग है कि इसे सुरक्षा की दृष्टि से जिला कोषागार (ककोर) के पुराने भवन में शिफ्ट किया जाए।
- SDM सदर का तबादला: अधिवक्ताओं की समस्याओं को नजरअंदाज करने और तहसील की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने में विफल रहे एसडीएम सदर का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण किया जाए।
लगातार 13 दिन से चल रही हड़ताल और अब क्रमिक अनशन शुरू होने के बाद, तहसील का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है। अब पूरे जिले की निगाहें जिलाधिकारी और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस बढ़ते गतिरोध को समाप्त करने और आम जनता को राहत दिलाने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।
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