लखनऊ/औरैया: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने एक बार फिर केंद्र की भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों और हालिया अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड डील पर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर निशाना साधते हुए इस डील को देश के कृषि और डेयरी सेक्टर के लिए “डेथ वारंट” बताया है।


“डील नहीं, ये तो ढील है”
अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि भाजपा की उल्टी गणित से जनता भ्रमित है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार को यह समझ नहीं आता कि 70% कृषि आधारित आबादी वाले देश के लिए ऐसी डील कभी लाभकारी नहीं हो सकती। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “भाजपा की उल्टी गणित से जनता फिर पूछ रही है: ज़ीरो (0) बड़ा या अठारह (18%)?”
ये डील नहीं, ढील है।
इस देश में कोई भी डील जो 70% कृषि आधारित जनता के लिए हानिकारक है वो कभी लाभकारी साबित नहीं हो सकती है।
कृषि और डेयरी को बचाने का जो झूठ सदन के पटल पर बोला जा रहा है, उसका संज्ञान भविष्य में लिया जाएगा और झूठा साबित होने पर कार्रवाई की माँग भी की जाएगी।… pic.twitter.com/CNt2EmKOAk
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) February 4, 2026


अखिलेश यादव के हमले के मुख्य बिंदु:
- किसानों के साथ विश्वासघात: अखिलेश ने आरोप लगाया कि कृषि और डेयरी को बचाने का जो ‘झूठ’ सदन में बोला जा रहा है, उसका भविष्य में संज्ञान लिया जाएगा और गलत साबित होने पर कार्रवाई की मांग की जाएगी।
- रंगदारी का आरोप: उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे भारत से 500 अरब डॉलर की ‘रंगदारी’ वसूली जा रही है।
- शर्तों पर सवाल: जब डील की शर्तें अभी पूरी तरह निर्धारित और हस्ताक्शरित ही नहीं हुई हैं, तो सरकार पहले से अपनी जीत के दावे कैसे कर सकती है?
- अमेरिका के सामने समर्पण: सपा अध्यक्ष के अनुसार, यह कोई कूटनीतिक जीत नहीं है, बल्कि अमेरिका अपने मुनाफे के हिसाब से भारत को ढाल रहा है।
“भाजपा इसमें कमीशनखोरी न तलाशे”
अखिलेश यादव ने चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपाई इस ‘हानि’ का उत्सव न मनाएं। उन्होंने इसे एक राष्ट्रीय आपदा बताते हुए कहा कि सरकार इसमें कमीशनखोरी के अवसर न तलाशे। उन्होंने उन लोगों पर भी निशाना साधा जो इसे ‘मील का पत्थर’ बता रहे हैं, यह कहते हुए कि उनकी “अक्ल पर पत्थर पड़ गए हैं।”
दबदबे की जीत या मजबूरी?
ट्वीट के अंत में उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए लिखा कि जो इसे भाजपा सरकार के दबदबे की जीत बता रहे हैं, वे दरअसल खुद को दबा हुआ महसूस कर रहे हैं। उनकी “जीभ भी दबी है और गर्दन भी।”
अखिलेश यादव का यह बयान स्पष्ट करता है कि आने वाले समय में ट्रेड डील और किसानों के मुद्दे पर राजनीति और तेज होने वाली है। विपक्षी खेमे ने इसे सीधे तौर पर ‘देश के हितों का समर्पण’ बताकर चुनावी माहौल गरमा दिया है।


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