औरैया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, औरैया ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) मेरठ को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए परिवादी के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने ईपीएफओ को आदेश दिया है कि वह 45 दिनों के भीतर कुल 3,84,159 रुपये की धनराशि 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ अदा करे। इसके अलावा मानसिक कष्ट के लिए 5,000 रुपये और वाद व्यय के रूप में 2,500 रुपये देने के निर्देश भी दिए गए हैं।


क्या है पूरा मामला
मामला औरैया जिले के ग्राम राजन्दाजपुर निवासी गिरजाशंकर से जुड़ा है, जो गैरीशन सिक्योरिटियस सहारनपुर के अधीन सुरक्षा गनमैन के पद पर कार्यरत थे। उनका पीएफ खाता ईपीएफओ मेरठ कार्यालय में पंजीकृत था।परिवादी के खाते में स्वयं का शेयर 2,13,414 रुपये, नियोक्ता अंशदान 86,319 रुपये तथा पेंशन अंशदान 84,426 रुपये जमा थे। कुल मिलाकर खाते में 3,84,159 रुपये की धनराशि मौजूद थी।
गिरजाशंकर ने पुत्री के विवाह और अन्य निजी आवश्यकताओं के लिए 20 नवंबर 2023 को भुगतान के लिए आवेदन किया था, लेकिन ईपीएफओ ने पुराने आधार कार्ड के निरस्त होने का हवाला देकर भुगतान रोक दिया।
नया आधार जमा करने के बाद भी नहीं हुआ भुगतान
परिवादी ने बाद में नया एवं सही आधार नंबर तथा संयुक्त घोषणा पत्र (ज्वाइंट डिक्लेरेशन फॉर्म) नियोक्ता के माध्यम से जमा कर दिया। इसके बावजूद ईपीएफओ कार्यालय द्वारा भुगतान नहीं किया गया।परिवादी ने कई बार कार्यालय के चक्कर लगाए और प्रथम अपील भी दाखिल की, लेकिन विभाग की ओर से कोई समाधान नहीं किया गया।


अधिवक्ता संजीव पांडेय ने रखे मजबूत साक्ष्य
परेशान होकर परिवादी ने अधिवक्ता संजीव पांडेय एडवोकेट एवं सदस्य मध्यस्थ प्रकोष्ठ, जिला उपभोक्ता आयोग औरैया के माध्यम से आयोग में परिवाद दायर किया।सुनवाई के दौरान ईपीएफओ की ओर से नोटिस तामील होने के बावजूद कोई उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद आयोग ने मामले की एकपक्षीय सुनवाई की।
अधिवक्ता संजीव पांडेय ने आयोग के समक्ष पीएफ पासबुक, संयुक्त घोषणा पत्र और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। साथ ही उन्होंने उच्चतम न्यायालय के महत्वपूर्ण फैसले रीजनल प्रोविडेंट फंड कमिश्नर बनाम शिव कुमार जोशी का हवाला देते हुए तर्क रखा कि ईपीएफओ का यह कृत्य स्पष्ट रूप से सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।
आयोग ने ईपीएफओ को माना दोषी
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जगन्नाथ मिश्र, सदस्य अमिता निगम एवं जितेन्द्र सिंह कुशवाह की पीठ ने अधिवक्ता की दलीलों और प्रस्तुत साक्ष्यों से सहमति जताई। आयोग ने माना कि परिवादी उपभोक्ता की श्रेणी में आता है और उसकी वैध धनराशि को रोके रखना अनुचित है। आयोग ने ईपीएफओ मेरठ को आदेश दिया कि वह वाद दायर करने की तिथि से वास्तविक भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित पूरी धनराशि का भुगतान सुनिश्चित करे।


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