औरैया: भौतिकता की अंधी दौड़ के बीच जब अध्यात्म की बयार बहती है, तो इंसान का मन स्वतः ही ईश्वर के चरणों में नतमस्तक हो जाता है। कुछ ऐसा ही अद्भुत और विहंगम नजारा जनपद औरैया के ग्राम उड़नपुरा में देखने को मिल रहा है। यहाँ आयोजित सात दिवसीय ‘श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ’ के दूसरे दिन आस्था का ऐसा अटूट सैलाब उमड़ा कि पूरा क्षेत्र भक्ति के रंग में रंग गया। आचार्य राम आशीष शुक्ल जी ने अपनी ओजस्वी और अमृतमयी वाणी से पांडाल में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं को भक्ति के उस सर्वोच्च शिखर पर पहुँचा दिया, जहाँ चारों ओर केवल ‘राधे-राधे’ की दिव्य गूंज ही सुनाई दे रही थी।


सती का अहंकार और बालक ध्रुव के संकल्प की गूंज
द्वितीय दिवस की कथा का शुभारंभ करते हुए आचार्य श्री ने जब सती चरित्र, उत्तानपाद प्रसंग और बालक ध्रुव की कठिन तपस्या का सजीव वर्णन किया, तो श्रोताओं की आंखें सजल हो उठीं। आचार्य जी ने माता सती के प्रसंग के माध्यम से समाज को एक गहरा संदेश देते हुए कहा कि जब किसी भी जीव के मन में अहंकार और भगवान के प्रति संशय पैदा होता है, तो उसका पतन निश्चित है। वहीं, बालक ध्रुव की कथा को विस्तार देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि सच्ची भक्ति और दृढ़ संकल्प की कोई आयु सीमा नहीं होती। मात्र पांच वर्ष की अल्पायु में ध्रुव ने जिस प्रकार अपनी माता के अपमान को अपनी सबसे बड़ी शक्ति बनाया और घोर तपस्या कर भगवान विष्णु को धरती पर आने को विवश कर दिया, वह इस बात का प्रमाण है कि सच्चे मन से की गई पुकार कभी निष्फल नहीं जाती। कथा के बीच-बीच में जब आचार्य जी ने अपने सुमधुर कंठ से भजनों की प्रस्तुति दी, तो पांडाल में उपस्थित महिला और पुरुष श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर अपनी सुध-बुध खो बैठे और झूमने लगे।
आयोजक मंडल की दिन-रात सेवा और संजीव पांडे की गरिमामयी उपस्थिति
इस भव्य और दिव्य धार्मिक आयोजन की सफलता के पीछे आयोजक मंडल की अथक मेहनत साफ नजर आ रही है। मुख्य आयोजक पप्पू तिवारी अपनी धर्मपत्नी के साथ मुख्य परीक्षित के रूप में व्यास पीठ का विधि-विधान से पूजन कर असीम पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। इस विशाल आयोजन को सुव्यवस्थित और भव्य बनाने के लिए उनके परिवारीजन भाई ललैया तिवारी, दामोदर तिवारी, मन्नी तिवारी, श्रीपति तिवारी, हरी तिवारी और शिवम तिवारी दिन-रात निस्वार्थ भाव से सेवा कार्यों में जुटे हुए हैं। ज्ञान यज्ञ के इस पावन अवसर पर संजीव पांडे (एडवोकेट) सहित क्षेत्र के कई संभ्रांत नागरिक और भारी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे और कथा का रसपान किया।
कल सजेगी भगवान नृसिंह की भव्य झांकी
कथा के विश्राम अवसर पर महाआरती उतारी गई, जिसके बाद हजारों भक्तों के बीच भारी मात्रा में भगवान का पवित्र प्रसाद वितरित किया गया। आयोजक मंडल ने जानकारी देते हुए बताया कि कथा के तीसरे दिन का कार्यक्रम और भी अधिक नयनाभिराम होने वाला है। कल ‘जड़ भरत चरित्र’ के साथ-साथ ‘भगवान नृसिंह अवतार’ की रोमांचक कथा सुनाई जाएगी और एक बेहद भव्य झांकी भी सजाई जाएगी, जो श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगी।


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