औरैया/कानपुर: एटीएम (ATM) से पैसे निकालते समय ट्रांजैक्शन फेल होने और खाते से पैसे कट जाने की समस्या आम है, लेकिन बैंक की मनमानी के खिलाफ एक जागरूक उपभोक्ता की बड़ी जीत सामने आई है। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) को तकनीकी खराबी के कारण फंसे हुए ₹10,000 की मूल राशि तो वापस करनी ही पड़ी, साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों का उल्लंघन करने के एवज में ₹2,800 की पेनल्टी (जुर्माना) भी उपभोक्ता के खाते में जमा करनी पड़ी।


1. 24 जनवरी को कानपुर के लखनपुर में फंसा था पैसा
यह पूरा घटनाक्रम 24 जनवरी 2026 को शुरू हुआ था।
- औरैया निवासी सुयश तिवारी ने कानपुर के लखनपुर स्थित PNB एटीएम से ₹10,000 निकालने का प्रयास किया था।
- एटीएम से नकदी नहीं निकली, लेकिन उनके मोबाइल पर खाते से ₹10,000 डेबिट (कटने) का संदेश आ गया।
2. बैंक ने पल्ला झाड़ा, बताया ‘सफल ट्रांजैक्शन’
सुयश ने तत्काल बैंक के पास शिकायत दर्ज कराई और ईमेल भी भेजा। लेकिन बैंक ने शुरुआती जांच में इसे ‘सफल ट्रांजैक्शन’ करार देते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया, जिससे सुयश बेहद परेशान हो गए।

3. अधिवक्ता संजीव पाण्डेय बने संकटमोचक (नि:शुल्क कानूनी मदद)
इस कठिन समय में उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता संजीव पाण्डेय ने सुयश का मार्गदर्शन किया।


- उन्होंने सुयश को बैंक की कार्यप्रणाली के विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया समझाई।
- उच्च अधिकारियों को ईमेल भेजने के साथ-साथ RBI के ‘बैंकिंग लोकपाल पोर्टल’ पर मजबूती से पक्ष रखने में मदद की।
- सबसे प्रेरणादायक बात यह रही कि अधिवक्ता संजीव पाण्डेय ने इस लंबी कानूनी प्रक्रिया में सुयश से एक भी रुपया परामर्श शुल्क (Fees) के रूप में नहीं लिया।
सुयश के अनुसार, बिना किसी शुल्क के मिली इस मदद और सही मार्गदर्शन के कारण ही वे अंततः बैंक के दावों को गलत साबित कर सके।
“अधिवक्ता की बात” : संजीव पाण्डेय का बयान


“RBI के कड़े हस्तक्षेप के बाद बैंक को अपनी भूल स्वीकार करनी पड़ी और न केवल मूल राशि लौटानी पड़ी, बल्कि RBI के सर्कुलर (DPSS.CO.PD No. 629/02.01.014/2019-20) के अनुसार तय सीमा के बाद भुगतान करने पर ₹100 प्रतिदिन के हिसाब से ₹2,800 का जुर्माना भी देना पड़ा। बैंकिंग प्रणाली में ‘ग्राहक ही राजा है’, लेकिन अक्सर जागरूकता के अभाव में ग्राहक स्वयं को असहाय पाता है।
मैंने सुयश की केवल कानूनी प्रक्रिया में सहायता की है, बाकी यह उनके साहस और धैर्य की जीत है। मैं उन लोगों के साथ खड़ा हूँ जिन्हें न्याय की जरूरत है पर वे कानूनी लड़ाई का खर्च नहीं उठा सकते। सुयश की लड़ाई लड़कर जो संतोष मुझे मिला है, वह किसी भी फीस से कहीं अधिक है। मेरा उद्देश्य हर उस पीड़ित की आवाज बनना है, जिसे बैंक की लापरवाही ने परेशान किया है और मैं इसे आगे भी जारी रखूँगा।”
औरैया टाइम्स अपडेट 📢
औरैया की हर बड़ी खबर सबसे पहले अपने WhatsApp पर पाने के लिए हमारे चैनल को फॉलो करें।

