औरैया: जनपद में पुलिस और विशेष जांच टीम (SIT) ने आर्थिक अपराध के एक ऐसे विशालकाय नेटवर्क को ध्वस्त किया है, जो डिजिटल सिस्टम की बारीकियों का फायदा उठाकर सरकारी तिजोरी में सेंध लगा रहा था। फर्जी जीएसटी फर्म बनाकर और बिना किसी वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के ₹2,29,50,000 (229.50 लाख रुपये) की इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) पास-ऑन करने वाले इस गिरोह का पर्दाफाश कर औरैया पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी अब तक की सबसे बड़ी जीत दर्ज की है।


1. 30 जुलाई से जारी ‘चक्रव्यूह’ का सफल समापन
इस पूरे सनसनीखेज मामले की शुरुआत 30 जुलाई 2025 को हुई थी, जब वीरी सिंह (उपायुक्त राज्य कर, इटावा संभाग) ने थाना कोतवाली औरैया में सर्व श्री शारदा ट्रेडिंग कंपनी (कस्बा खानपुर) के खिलाफ तहरीर दी थी। जांच में पाया गया कि इस फर्म ने राजस्थान की गौरी शंकर ट्रेडिंग कंपनी से फर्जी खरीद दिखाई थी। जब धरातल पर भौतिक सत्यापन हुआ, तो न तो कोई घोषित व्यापारिक स्थल मिला और न ही कोई माल। इसके बाद औरैया एसपी के निर्देशन में एक विशेष SIT गठित की गई, जिसने तकनीकी और मैनुअल साक्ष्यों के आधार पर इस सिंडिकेट के परखच्चे उड़ा दिए।
2. ‘एडिटिंग’ और ‘जालसाजी’ का खौफनाक नेक्सस
गिरोह की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) किसी शातिर फिल्म की पटकथा जैसी थी:
- डाटा की डकैती: अभियुक्त श्यामसुन्दर पासवान भोले-भाले लोगों को नौकरी का झांसा देकर उनके आधार और पैन कार्ड ले लेता था।
- डिजिटल मैन्युपुलेशन: मुख्य आरोपी अशोक पासवान इन दस्तावेजों और बिजली के बिल/किरायानामा को कंप्यूटर पर ‘एडिट’ करके फर्जी पते पर बोगस फर्म रजिस्टर्ड करता था।
- कागजी साम्राज्य: गिरोह इन बोगस फर्मों के माध्यम से फर्जी इनवॉइस, ई-वे बिल और बिल्टी तैयार कर वास्तविक फर्मों को देता था, ताकि वे अवैध तरीके से ITC क्लेम कर सकें। इसके बदले ये लोग भारी कमीशन वसूलते थे।
3. औरैया-मधूपुर रोड पर घेराबंदी और गिरफ्तारी
मुखबिर की सटीक सूचना पर SIT टीम ने औरैया के बरमूपुर नहर पुलिया से मधूपुर रोड की ओर घेराबंदी की। यहाँ से मुख्य अभियुक्त श्यामसुन्दर पासवान और अशोक कुमार पासवान (निवासी धनबाद, झारखंड) को गिरफ्तार किया गया। इनसे मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने गिरोह के स्थानीय मददगारों, महावीर शरण उर्फ पहाड़िया (मंडी व्यापारी) और विमल कुमार को भी दबोच लिया।


4. अभियुक्तों की भूमिका: कौन था इस खेल का ‘असली खिलाड़ी’?
- श्यामसुन्दर पासवान (उम्र 43): गिरोह का मुख्य चेहरा, जो नौकरी के नाम पर लोगों को फंसाकर उनके दस्तावेजों से फर्जी खाता संचालन करता था।
- अशोक कुमार पासवान (उम्र 32): गिरोह का ‘तकनीकी माइंड’, जो कंप्यूटर एडिटिंग के जरिए फर्जी फर्म और मुहरें तैयार करने में माहिर था।
- महावीर शरण उर्फ पहाड़िया (उम्र 55): औरैया गल्ला मंडी का व्यापारी। यह अपने ट्रकों को पास कराने के लिए झारखंड के नेटवर्क का इस्तेमाल करता था और बोगस फर्मों के जरिए राजस्व को क्षति पहुँचाता था।
- विमल कुमार (उम्र 42): इसने ‘जय महादेव ट्रेडिंग कंपनी’ के नाम से फर्जी खाता खोल रखा था और घोटाले के लाभ में से अपना हिस्सा प्राप्त करता था।
5. छापेमारी में बरामद ‘डिजिटल खजाना’
पुलिस ने अभियुक्तों के कब्जे से भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है:
- नगदी: ₹6000
- इलेक्ट्रॉनिक: 02 लैपटॉप, 08 एंड्रॉइड फोन, 09 कीपैड फोन और 20 सक्रिय सिम कार्ड।
- दस्तावेज: 21 फर्जी मुहरें (विभिन्न बोगस कंपनियों की), 12 आधार कार्ड, 08 चेक बुक, 07 पासबुक और 07 डेबिट कार्ड।
- रिकॉर्ड: 11 रजिस्टर, 04 नोटबुक और फाइलों का पूरा बंडल।

6. विधिक कार्यवाही और SIT टीम की सफलता
पुलिस ने मु0अ0सं0 543/2025 में धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) BNS के साथ-साथ अब धारा 317(2) और 3(5) BNS की बढ़ोतरी कर दी है। इस सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक राजीव कुमार, भूपेंद्र सिंह (प्रभारी निरीक्षक अपराध शाखा), अनूप कुमार मौर्य और हेमंत चौधरी (साइबर थाना) शामिल रहे।


‘Auraiya Times’ इस साहसिक कार्रवाई के लिए औरैया पुलिस और एसआईटी को सलाम करता है। यह उन भ्रष्ट तत्वों के लिए एक चेतावनी है जो सोचते हैं कि सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर वे बच निकलेंगे। औरैया पुलिस ने बता दिया है कि यहाँ ‘सिंघम’ स्टाइल में न्याय होता है!
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