कंचौसी (औरैया): भाग्यनगर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत जमौली इन दिनों भक्ति के रस में सराबोर है। यहाँ स्थित बाबा ब्रह्मदेव मंदिर में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन मंगलवार को भगवान श्री कृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं और गोवर्धन पर्वत धारण करने की कथा का अत्यंत सजीव वर्णन किया गया।


1. बाल लीलाओं से मोह लिया सबका मन
कथा वाचक आचार्य अरुण अवस्थी महाराज ने भगवान श्री कृष्ण के बचपन के प्रसंगों को सुनाते हुए कहा कि प्रभु की लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानव जीवन के लिए महान प्रेरणा हैं।
- नटखट कान्हा: महाराज जी ने बताया कि बाल कृष्ण अपनी चंचलता से गोकुल वासियों का मन मोह लिया करते थे।
- माखन चोरी प्रसंग: जब माता यशोदा के पास उनकी रोज शिकायतें आती थीं, तब कान्हा बड़ी चतुराई से मुंह खोलकर यह दिखा देते थे कि उन्होंने माखन नहीं खाया है। इस प्रसंग के दौरान उपस्थित श्रद्धालु “हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की” के जयकारों से झूम उठे।
2. गोवर्धन पूजा: अहंकार पर भक्ति की विजय
कथा के दौरान गोवर्धन पर्वत धारण करने का प्रसंग भी सुनाया गया। आचार्य ने बताया कि कैसे भगवान ने देवराज इंद्र का अहंकार तोड़ने और गोकुल वासियों की रक्षा के लिए अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया था। इस प्रसंग के माध्यम से प्रकृति प्रेम और सामूहिक शक्ति का संदेश दिया गया।



3. आयोजन की भव्यता और श्रद्धा
धार्मिक अनुष्ठान के चौथे दिन पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित गणमान्य उपस्थित रहे:
- मुख्य आचार्य: अरुण अवस्थी महाराज।
- सहयोगी: सह आचार्य शिवम त्रिवेदी।
- परीक्षित: शीतल श्याम सिंह कुशवाहा एवं सुशीला देवी।
- आयोजक: शिशुपाल सिंह कुशवाहा।
सैकड़ों की संख्या में आए श्रद्धालुओं ने कथा के उपरांत आरती में भाग लिया और प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त किया।
‘Auraiya Times’ ऐसे धार्मिक आयोजनों को ग्रामीण संस्कृति और आध्यात्मिक जागृति का आधार मानता है। जमौली में चल रही यह कथा क्षेत्र में शांति और सद्भाव का संदेश फैला रही है।
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