औरैया: जनपद में आम के गुणवत्तायुक्त उत्पादन और बागवानों को वित्तीय हानि से बचाने के लिए उद्यान विभाग औरैया ने एक महत्वपूर्ण परामर्श जारी किया है। अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान समय आम की फसल के लिए अत्यंत संवेदनशील है क्योंकि इस समय पेड़ों पर बौर (मंजरियां) आ रही हैं। यदि सही समय पर प्रबंधन न किया गया, तो कीट और रोग पूरी फसल को नष्ट कर सकते हैं।


1. प्रमुख कीट और उनसे होने वाली क्षति
- भुनगा कीट (Hopper): यह कीट कोमल पत्तियों और छोटे फलों का रस चूसता है। इसके द्वारा विसर्जित मीठे पदार्थ पर काली फफूँद (Sooty Mould) जम जाती है, जिससे प्रकाश संश्लेषण रुक जाता है।
- मिज कीट (Midge): यह मंजरियों और मुलायम कोपलों के अंदर अंडे देती है, जिससे प्रभावित भाग काला होकर सूख जाता है।
- थ्रिप्स (रूजी कीट): यह फूलों और नई पत्तियों को नुकसान पहुँचाता है, जिससे फलों के विकास में बाधा आती है।
- कैटरपिलर (ब्लैक इंच वर्म): यह कीट बागवानों के लिए सबसे बड़ा खतरा है। यह न केवल पत्तियों को खाता है, बल्कि छोटे फलों को डंठल से काटकर जमीन पर गिरा देता है।
2. रोगों का प्रबंधन: खर्रा रोग (Powdery Mildew)
इस रोग में फल और डंठलों पर सफेद चूर्ण जैसा फफूँद दिखाई देता है। मंजरियां सूखने लगती हैं और फल पीले पड़कर गिर जाते हैं।
- उपचार: प्रथम छिड़काव घुलनशील सल्फर (गंधक) 02 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर करें। आवश्यकता पड़ने पर दूसरा छिड़काव हेक्साकोनोजोल (02 ग्राम/लीटर) का करें।

3. रसायनिक और यांत्रिक नियंत्रण के उपाय
उद्यान विभाग ने कीटों के नियंत्रण के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
| कीट का नाम | रसायनिक नियंत्रण (दवा की मात्रा प्रति लीटर पानी) | यांत्रिक विधि |
| भुनगा एवं मिज कीट | इमिडाक्लोप्रिड 17.1% SL (1.0 ml) या फिप्रोनिल 5% SC (1.0 ml) | ब्लू एवं येलो स्टिकी ट्रैप (20-25 प्रति हेक्टेयर) |
| थ्रिप्स (रूजी कीट) | फिप्रोनिल 5% SC या थियाक्लोप्रिड 21.7% SC (0.5 ml) | स्टिकी ट्रैप का प्रयोग |
| कैटरपिलर/कटर कीट | क्लोरोसाइपर (1.0 ml) या इमामेक्टिन बैंजोएट 5% SG (0.5 ml) | लाइट-ट्रैप (Light-Trap) का प्रयोग |
| गुजिया कीट | इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL (0.5 ml) के साथ 1% शैम्पू मिलाकर | पॉलीथीन पट्टी की सफाई |
4. बागवानों के लिए विशेष सावधानी
उद्यान विभाग ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है: “जब पेड़ों पर बौर (फूल) पूरी तरह से खिला हो, उस समय किसी भी रसायनिक दवा का छिड़काव न करें।” ऐसा इसलिए है क्योंकि इस समय छिड़काव करने से ‘पर-परागण’ (Cross-Pollination) करने वाले मित्र कीट मर सकते हैं, जिससे फल लगने की प्रक्रिया बाधित हो जाएगी।


‘Auraiya Times’ सभी बागवान भाइयों से अपील करता है कि कृषि रक्षा रसायनों का प्रयोग विभाग द्वारा बताई गई मात्रा के अनुसार ही करें। किसी भी संशय की स्थिति में जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय से संपर्क अवश्य करें ताकि आपकी मेहनत की फसल सुरक्षित रहे।
औरैया टाइम्स अपडेट 📢
औरैया की हर बड़ी खबर सबसे पहले अपने WhatsApp पर पाने के लिए हमारे चैनल को फॉलो करें।




