कंचौसी (औरैया): क्षेत्र के प्रसिद्ध ग़मा देवी मंदिर में पिछले सात दिनों से चल रहा आध्यात्मिक समागम बुधवार को पूर्णाहूति, हवन और विशाल भंडारे के साथ संपन्न हो गया। इस धार्मिक अनुष्ठान के अंतिम दिन समूचा क्षेत्र भक्ति के रंग में रंगा नजर आया और सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ कमाया।


1. कथा वाचक का संदेश: सेवा और संस्कार ही असली धर्म
सप्ताह भर चली इस ज्ञान गंगा में कथा वाचक आचार्य ऋषभ देव पाण्डेय ने अपनी ओजस्वी वाणी से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने केवल पौराणिक प्रसंग ही नहीं सुनाए, बल्कि समाज को एक नई दिशा देने का भी प्रयास किया:
- माता-पिता की सेवा: आचार्य ने संदेश दिया कि संसार में माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
- सत्य का मार्ग: उन्होंने भक्तों को सदैव सत्य की राह पर चलने और ऋषि-मुनियों के बताए आदर्शों को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी।
2. कृष्ण-सुदामा मिलन पर भावुक हुए भक्त
कथा के अंतिम पड़ाव पर आचार्य ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का मार्मिक वर्णन किया।
- कंस वध और मर्यादा: कृष्ण द्वारा कंस वध और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों की कथा सुनाई गई।
- सुदामा प्रसंग: विशेष रूप से कृष्ण-सुदामा मिलन के प्रसंग ने पांडाल में मौजूद हर आंख को नम कर दिया। भक्त ध्रुव और प्रहलाद की कथाओं के माध्यम से अटूट श्रद्धा की शक्ति को समझाया गया।
3. हवन और भंडारे से हुआ समापन
बुधवार सुबह विधि-विधान के साथ हवन-पूजन किया गया, जिसमें यजमानों ने आहुतियां देकर विश्व कल्याण की कामना की। इसके पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। मंदिर परिसर में ‘पंगत’ में बैठकर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।


इनकी रही मुख्य उपस्थिति
आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय भक्तों का विशेष सहयोग रहा। इस मौके पर मुख्य रूप से नंदू शर्मा, सौरभ सिंह, चतुर पाल, संतोष कठेरिया, बब्बी कुमार सहित भारी संख्या में पुरुष, महिलाएं और बच्चे मौजूद रहे।
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