औरैया: जनपद के फफूँद थाना क्षेत्र के सींगनपुर गांव में हाल ही में जो हुआ, वह किसी बॉलीवुड थ्रिलर फिल्म की पटकथा से कम नहीं था। राकेश वाल्मीकि की 25 वर्षीय बेटी रीना ने अपने घर से भागने के लिए जिस ‘नागिन ड्रामे’ का सहारा लिया, उसने विज्ञान और कानून की व्यवस्था को कुछ घंटों के लिए ठिठकने पर मजबूर कर दिया।


1. रात 3 बजे की वो ‘फिल्मी’ साजिश
रीना के परिजनों ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी थी, जो उसे कतई मंजूर नहीं था। रविवार रात करीब 3 बजे, जब पूरा गांव गहरी नींद में था, रीना ने अपने कमरे में वह सामान सजाया जो किसी को भी डराने के लिए काफी था। उसने अपने बिस्तर पर:
- करीब 5 फीट लंबी सांप की कांचली (केंचुल) रखी।
- अपनी अंगूठी (रिंग) और चूड़ियां केंचुल के पास ही छोड़ दीं।
- गले का पवित्र धागा भी उतारकर वहीं रख दिया, ताकि घरवाले इसे ‘कायापलट’ या ‘दैवीय चमत्कार’ समझें।
2. 48 घंटे का ‘प्री-प्लानिंग’ ऑपरेशन
मीडिया रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई कि यह कोई आनन-फानन में लिया गया फैसला नहीं था। गांव के ही कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि रीना पिछले दो दिनों से खेतों और सुनसान झाड़ियों में कुछ तलाश रही थी। पुलिस का मानना है कि वह इस ड्रामे के लिए ‘परफेक्ट’ केंचुल की तलाश में थी, ताकि उसकी अनुपस्थिति को एक रहस्यमयी मोड़ दिया जा सके।
3. जब ‘चमत्कार’ के नाम पर जुटने लगी भीड़
सोमवार सुबह जब घरवाले उसे जगाने पहुँचे, तो कमरे का नजारा देखकर चीख निकल गई। बेटी गायब थी और बिस्तर पर सांप की केंचुल पड़ी थी। देखते ही देखते खबर आग की तरह फैली कि “लड़की नागिन बनकर कहीं चली गई है।” अंधविश्वास का आलम यह था कि लोग उसके घर पर ‘दर्शन’ के लिए जुटने लगे और तरह-तरह की मनगढ़ंत कहानियाँ बनाई जाने लगाीं।


4. पुलिस की ‘वैज्ञानिक’ जांच ने खोली पोल
सूचना मिलते ही थाना प्रभारी अजय कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने जब वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जांच की, तो कड़ियाँ जुड़ने लगीं:
- मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स: रीना के फोन से गांव के ही एक युवक के साथ लगातार संपर्क की बात सामने आई।
- पारिवारिक विवाद: यह तथ्य भी उजागर हुआ कि प्रेम प्रसंग को लेकर घरवालों ने पहले रीना की पिटाई की थी, जिससे वह काफी आहत थी।
- सुनियोजित साजिश: बिस्तर पर श्रृंगार के सामान का सलीके से रखा होना यह दर्शा रहा था कि यह काम किसी नागिन का नहीं, बल्कि एक तनावग्रस्त युवती का है जो घर से पीछा छुड़ाना चाहती थी।
5. सामाजिक विश्लेषण: अंधविश्वास ही क्यों बना ढाल?
शोध और विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रामीण अंचलों में आज भी ‘दैवीय चमत्कार’ या ‘इच्छाधारी’ होने जैसी कहानियों की जड़ें बहुत गहरी हैं। रीना ने इसी ‘कलेक्टिव सबकॉन्शियस’ (सामूहिक अवचेतन) का फायदा उठाया। उसे पता था कि अगर वह साधारण तरीके से भागती, तो पुलिस और समाज उसे तुरंत ‘अपराधी’ या ‘चरित्रहीन’ ठहरा देता, लेकिन ‘नागिन’ का नाम जुड़ते ही मामला आस्था और भय में बदल गया, जिससे उसे भागने के लिए जरूरी समय मिल गया। यह घटना दर्शाती है कि समाज में वैज्ञानिक सोच की कमी का फायदा अब युवा अपने निजी विद्रोह के लिए भी करने लगे हैं।
अंधविश्वास और अफवाहें अक्सर हकीकत को छिपाने का मुखौटा होती हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे युवाओं के साथ संवाद का रास्ता खुला रखें, ताकि उन्हें अपनी बात रखने के लिए ऐसे खतरनाक और भ्रमित करने वाले रास्तों का चुनाव न करना पड़े।
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