औरैया (फफूंद): किसानों के लिए उनकी फसल सिर्फ उपज नहीं, बल्कि उनके साल भर की उम्मीद होती है। लेकिन औरैया के फफूंद इलाके में इसी उम्मीद की रखवाली करना एक बुजुर्ग किसान के लिए जानलेवा साबित हुआ। आवारा सांड के हमले ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं।


शाम की रखवाली बनी आखिरी सफर
मामला फफूंद थाना क्षेत्र के नगला पाठक गांव का है। शुक्रवार की शाम करीब 7 बजे, 70 वर्षीय जय नारायण पाल अपने छोटे भाई सोवरन सिंह पाल के साथ खेत पर निकले थे। गेहूं की लहलहाती फसल को बचाने की चुनौती उनके सामने थी। उन्हें क्या पता था कि जिस जमीन को उन्होंने खून-पसीने से सींचा है, वही उनके जीवन की आखिरी गवाह बनेगी।
आपा खो बैठा सांड, संभलने का भी नहीं मिला मौका
खेत में एक सांड को फसल चरते देख जय नारायण उसे भगाने के लिए आगे बढ़े। आमतौर पर भाग जाने वाले मवेशी के बजाय, उस सांड ने हिंसक रुख अख्तियार कर लिया। सांड ने बुजुर्ग किसान पर हमला कर उन्हें अपनी सींगों पर उठा लिया और जमीन पर जोर-जोर से पटकना शुरू कर दिया।
पास ही मौजूद छोटे भाई ने जब जय नारायण की चीख सुनी, तो वह दौड़कर पहुंचा। कड़ी मशक्कत के बाद सांड को वहां से खदेड़ा गया, लेकिन तब तक जय नारायण पाल लहूलुहान हो चुके थे और उनके शरीर में गहरी अंदरूनी चोटें आ चुकी थीं।


अस्पताल की भागदौड़ भी नहीं बचा सकी जान
परिजनों ने आनन-फानन में उन्हें दिबियापुर सीएचसी पहुंचाया। हालत बिगड़ती देख डॉक्टरों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अस्पताल पहुंचते-पहुंचते जय नारायण की सांसें थम गईं और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
गांव में आक्रोश और मातम
इस घटना के बाद से नगला पाठक गांव में सन्नाटा पसरा है। मृतक के दोनों बेटों—सर्वेश और मुकेश—का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव वालों का कहना है कि आवारा जानवरों का आतंक अब जानलेवा होता जा रहा है।
थाना प्रभारी राजीव कुमार सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। शव को पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है ताकि कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके।




