औरैया: जनपद के भाग्यनगर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बूढ़ादाना से एक वैचारिक संदेश सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है । यहाँ के युवा ग्राम प्रधान मोहित सिंह की होर्डिंग और पोस्टर को कुछ अज्ञात लोगों द्वारा फाड़े जाने की घटना सामने आई है। इस कृत्य पर प्रधान ने उत्तेजित होने के बजाय अपनी लेखनी के माध्यम से विरोधियों को आत्मचिंतन करने का अवसर दिया है।


“होर्डिंग फाड़कर क्या सोच बड़ी हुई?”
ग्राम प्रधान मोहित सिंह ने अपनी पोस्ट के माध्यम से उन लोगों से सवाल पूछा है जो इस तरह की तोड़-फोड़ में विश्वास रखते हैं। उन्होंने लिखा कि अगर किसी की होर्डिंग फाड़कर किसी को सुकून मिलता है, तो उसे एक बार खुद से पूछना चाहिए कि क्या इससे उसकी सोच बड़ी हुई या समाज मजबूत हुआ?
लोकतंत्र में असहमति का सम्मान
मोहित सिंह ने अपने संदेश में लोकतंत्र की खूबसूरती का जिक्र करते हुए कहा कि असहमति होना एक ताक़त है, लेकिन तोड़-फोड़ करना लोकतंत्र की हार है। उनका यह बयान उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो वैचारिक मतभेद को व्यक्तिगत रंजिश में बदल देते हैं।


विचारों की शक्ति पर जोर
प्रधान ने बहुत ही गहरे शब्दों में अपनी बात समाप्त करते हुए लिखा:
“काग़ज़ फाड़े जा सकते हैं, विचार नहीं। पोस्टर हटाए जा सकते हैं, सच नहीं।”
क्षेत्र में चर्चा का विषय
भाग्यनगर ब्लॉक के इस गांव में प्रधान मोहित सिंह का यह शांत और सुलझा हुआ व्यवहार काफी सराहा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि राजनीति में विरोध के अपने शालीन तरीके होते हैं, लेकिन किसी की प्रचार सामग्री को नुकसान पहुँचाना ओछी मानसिकता का परिचायक है।
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