औरैया: आज 15 मार्च है, यानी ‘विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस’। यह दिन हमें याद दिलाता है कि बाजार हमारे पैसों से चलता है और हम इसके असली सरताज हैं। इस पावन अवसर पर औरैया जनपद के जाने-माने उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता संजीव पाण्डेय ने ‘Auraiya Times’ के माध्यम से जिले और प्रदेश की जनता के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और आंखें खोल देने वाला संदेश जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि कानून की नजर में ग्राहक केवल एक क्रेता (खरीददार) नहीं, बल्कि बाजार का ‘राजा’ है। लेकिन दुर्भाग्यवश, आज का आधुनिक और डिजिटल बाजार विज्ञापनों का एक ऐसा भ्रामक मायाजाल बुनता है, जिसकी चकाचौंध में फंसकर आम उपभोक्ता ठगा जाता है और अपने असली अधिकारों से पूरी तरह वंचित रह जाता है।


कानून में है 3 साल की जेल का प्रावधान, फिर भी क्यों हारते हैं केस?
अधिवक्ता संजीव पाण्डेय ने बताया कि ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019’ (Consumer Protection Act 2019) ने देश के आम नागरिक को इतनी असीमित शक्ति दी है कि हम बड़े से बड़े और रसूखदार सेवा प्रदाता या कंपनी को कानून के कटघरे में लाकर खड़ा कर सकते हैं। इस कड़े कानून में दोषी पाए जाने पर कंपनियों के प्रबंधकों को तीन साल तक की जेल और उनकी संपत्ति की कुर्की तक का कड़ा प्रावधान मौजूद है। लेकिन इसके बावजूद यह एक कड़वी और दुखद सच्चाई है कि अक्सर जागरूक होने के बावजूद उपभोक्ता महज अपनी छोटी-छोटी तकनीकी भूलों के कारण जीती हुई लड़ाई कोर्ट में हार जाते हैं।
‘ई-दाखिल’ की तकनीकी खामियां और वकील की अहमियत
आजकल ऑनलाइन शिकायत के लिए ‘ई-दाखिल’ (e-Daakhil) पोर्टल काफी चलन में है। अधिवक्ता पाण्डेय आगाह करते हुए बताते हैं कि इस पोर्टल के जरिए शिकायत दर्ज करना दिखने में सरल जरूर लगता है, लेकिन आम आदमी द्वारा कानूनी धाराओं की गलत व्याख्या और साक्ष्यों (सबूतों) के सही क्रम का अभाव पूरे केस की बुनियाद को बेहद कमजोर कर देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अदालत में एक वकील की भूमिका केवल खड़े होकर बहस करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह उपभोक्ता की पीड़ा और भावनाओं को एक सटीक कानूनी भाषा में ढालकर उसे अटूट साक्ष्य में तब्दील कर देता है।
यदि आप किसी सेवा में कमी, खराब प्रोडक्ट या अनुचित व्यापारिक व्यवहार (Unfair Trade Practice) के शिकार हुए हैं, तो सिर्फ सोशल मीडिया पर शोर मचाने या भड़ास निकालने से कुछ हासिल नहीं होगा। इसके बजाय, किसी उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञ वकील के उचित मार्गदर्शन में ही आयोग (Consumer Forum) की दहलीज पर कदम रखें। एक विशेषज्ञ अधिवक्ता आपकी शिकायत को ऐसी अभेद्य कानूनी मजबूती प्रदान करता है कि कंपनियों के महंगे वकीलों द्वारा तकनीकी आधार पर उस केस के खारिज होने की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती।


‘पक्का बिल’ ही है आपकी सबसे बड़ी ढाल, लें संकल्प
अपने संदेश के अंत में एडवोकेट संजीव पाण्डेय ने सभी पाठकों से एक पुरजोर अपील की है कि बाजार से सुई खरीदें या सोना, उसका ‘पक्का बिल’ (GST Bill) लेना कभी न भूलें। यही एक पक्का बिल कोर्ट रूम में आपके दावे की सबसे पहली और इकलौती गवाही बनता है। उन्होंने आगाह किया कि टीवी और मोबाइल पर दिखने वाले विज्ञापनों के चमक-धमक वाले प्रलोभनों से हमेशा सावधान रहें और खरीदारी करते समय गुणवत्ता मानकों (Quality Standards) को स्वयं अपनी आंखों से परखें।

‘Auraiya Times’ एडवोकेट संजीव पाण्डेय जी के इस बेबाक और जनहितैषी विचारों का हृदय से समर्थन करता है। 15 मार्च का दिन केवल शुभकामना संदेश भेजने का नहीं, बल्कि अपने हकों के प्रति जागने का दिन है। हम उम्मीद करते हैं कि हमारे पाठक इस कानूनी मार्गदर्शन को अपने जीवन में उतारेंगे और “जागो ग्राहक जागो” के नारे को सही मायनों में चरितार्थ करेंगे।
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