Panchayat Chunav : पंचायत चुनाव का मतलब सिर्फ वोट डालना और किसी को जिताना नहीं है, बल्कि यह अपने गाँव और क्षेत्र के विकास की नींव रखने का सबसे बड़ा मौका होता है। हम अक्सर जोश में आकर प्रधान या ज़िला पंचायत सदस्य तो चुन लेते हैं, लेकिन चुनाव के बाद हमें यह पता ही नहीं होता कि हमारे द्वारा चुने गए इन प्रतिनिधियों का असल में काम क्या है? नाली बनवाने का काम किसका है और बड़ी सड़क बनवाने का ठेका किसके पास है?


औरैया टाइम्स की ‘पंचायत चुनाव विशेष सीरीज़’ के इस दूसरे भाग में आज हम आपको आसान भाषा में बताएंगे कि ग्राम प्रधान, BDC (क्षेत्र पंचायत सदस्य) और ज़िला पंचायत सदस्य के अधिकार, कार्य और शक्तियां क्या-क्या होती हैं। ताकि अगली बार जब आपके गाँव में कोई समस्या हो, तो आपको पता हो कि किस कॉलर को पकड़ना है!
संविधान की 11वीं अनुसूची और पंचायतों के 29 कार्य
इससे पहले कि हम अलग-अलग प्रतिनिधियों के काम समझें, यह जानना ज़रूरी है कि 1992 में हुए 73वें संविधान संशोधन के तहत, संविधान में 11वीं अनुसूची जोड़ी गई थी। इस अनुसूची में पंचायतों को कुल 29 विषय (Subjects) सौंपे गए हैं, जिन पर काम करने का अधिकार गाँव की सरकार को है। इनमें कृषि, सड़क, पीने का पानी, पशुपालन, शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास जैसे बेहद अहम मुद्दे शामिल हैं।
आइए अब त्रिस्तरीय पंचायत के तीनों स्तरों के प्रतिनिधियों के कार्यों को विस्तार से समझते हैं:


1. ग्राम प्रधान (सरपंच) के कार्य और अधिकार
ग्राम प्रधान पंचायत व्यवस्था की सबसे अहम और ज़मीनी कड़ी होता है। गाँव के विकास की सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदारी और सबसे ज़्यादा सीधा बजट ग्राम प्रधान के पास ही आता है।
ग्राम प्रधान के मुख्य कार्य इस प्रकार हैं:
- बुनियादी ढांचा (Infrastructure): गाँव के अंदर खड़ंजा बिछवाना, सीसी रोड (CC Road) बनवाना, जल निकासी के लिए पक्की नालियों का निर्माण और उनकी नियमित साफ़-सफाई करवाना।
- पेयजल व्यवस्था: गाँव में इंडिया मार्का हैंडपंप लगवाना, उनकी मरम्मत करवाना और ‘हर घर जल’ जैसी योजनाओं को गाँव में सुचारू रूप से लागू करवाना।
- स्ट्रीट लाइट और पंचायत भवन: गाँव की गलियों में सोलर लाइट या स्ट्रीट लाइट लगवाना। पंचायत भवन और सामुदायिक शौचालयों का निर्माण और रखरखाव करना।
- मनरेगा (MGNREGA) के कार्य: गाँव के मज़दूरों को मनरेगा के तहत रोज़गार उपलब्ध कराना, तालाबों की खुदाई, चकबंदी के रास्ते बनवाना और वृक्षारोपण (पेड़ लगवाना) कराना।
- सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना: विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, विकलांग पेंशन और प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana) के पात्र लोगों की सूची तैयार करके उन्हें लाभ दिलाना।
- शिक्षा और स्वास्थ्य: गाँव के प्राइमरी स्कूल की मरम्मत, मिड-डे मील (Mid-Day Meal) की गुणवत्ता की देखरेख और आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन में मदद करना।
- वित्तीय अधिकार (Financial Powers): ग्राम पंचायत के खाते से कोई भी पैसा ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी (VDO/सचिव) के संयुक्त हस्ताक्षर (Joint Sign) के बिना नहीं निकाला जा सकता।
2. क्षेत्र पंचायत सदस्य (BDC) और ब्लॉक प्रमुख के कार्य
ब्लॉक (विकास खंड) स्तर पर विकास की रूपरेखा तैयार करने का काम क्षेत्र पंचायत का होता है। इसमें BDC और ब्लॉक प्रमुख की भूमिका बहुत खास होती है।


BDC (Block Development Council Member) के कार्य:
- ब्लॉक प्रमुख का चुनाव: BDC सदस्य का सबसे पहला और बड़ा काम अपने बीच में से किसी एक योग्य व्यक्ति को ‘ब्लॉक प्रमुख’ चुनना होता है।
- ग्राम और ब्लॉक के बीच की कड़ी: BDC सदस्य अपने वार्ड (जिस क्षेत्र से वे जीते हैं) की समस्याओं को क्षेत्र पंचायत (ब्लॉक) की बैठकों में उठाते हैं।
- निगरानी और प्रस्ताव: ग्राम पंचायत में जो काम नहीं हो पा रहे हैं या जिनके लिए बड़ा बजट चाहिए, BDC उन कार्यों का प्रस्ताव ब्लॉक में देते हैं (जैसे- दो गाँवों को जोड़ने वाला रास्ता)।
ब्लॉक प्रमुख के कार्य और अधिकार:
- बजट का वितरण: ब्लॉक में आने वाले विकास फंड को क्षेत्र पंचायत सदस्यों के प्रस्ताव के आधार पर अलग-अलग गाँवों में आवंटित करना।
- बड़े निर्माण कार्य: ब्लॉक स्तर के अस्पताल, बड़े इंटरलॉकिंग रास्ते, और कृषि मंडियों के रखरखाव का कार्य देखना।
- निगरानी: ग्राम पंचायतों के कार्यों और खंड विकास अधिकारी (BDO) के साथ मिलकर सरकारी योजनाओं की ब्लॉक स्तर पर मॉनिटरिंग करना।
3. ज़िला पंचायत सदस्य और ज़िला पंचायत अध्यक्ष के कार्य
यह पूरे ज़िले के ग्रामीण इलाकों की सबसे बड़ी ‘संसद’ की तरह काम करती है। इसका बजट सबसे ज़्यादा होता है और इसके कार्य भी बड़े स्तर के होते हैं।
ज़िला पंचायत सदस्य के कार्य:
- ज़िला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव: हर वार्ड से जीत कर आए सदस्य (जिनमें कई ऊर्जावान युवा ज़िला पंचायत सदस्य भी शामिल होते हैं) सबसे पहले मतदान करके ‘ज़िला पंचायत अध्यक्ष’ का चुनाव करते हैं।
- ज़िले की बैठकों में मुद्दे उठाना: सदस्य अपने क्षेत्र की बड़ी समस्याओं (जैसे— मुख्य सड़क का निर्माण, बड़े नालों की समस्या, या स्वास्थ्य केंद्रों की कमी) को ज़िला पंचायत की बोर्ड बैठकों (Board Meetings) में प्रमुखता से उठाते हैं।
- निधि का प्रयोग: ज़िला पंचायत सदस्यों को अपने क्षेत्र में काम कराने के लिए ज़िला पंचायत निधि से एक तय बजट मिलता है, जिससे वे विकास कार्य प्रस्तावित करते हैं।
ज़िला पंचायत अध्यक्ष के कार्य और शक्तियां:
- ज़िले का ग्रामीण विकास: पूरे ज़िले के ग्रामीण क्षेत्रों की संपर्क मार्गों (Connecting Roads), बड़े पुल-पुलिया और डामर (तारकोल) की सड़कों का निर्माण करवाना।
- राज्य और केंद्र के फंड का प्रबंधन: ज़िला स्तर पर आने वाले करोड़ों रुपये के बजट को सदस्यों की मांग और क्षेत्र की ज़रूरत के हिसाब से पास करना।
- समन्वय (Coordination): ज़िलाधिकारी (DM), मुख्य विकास अधिकारी (CDO) और अन्य बड़े अधिकारियों के साथ मिलकर पूरे ज़िले की विकास योजनाओं का खाका (Blueprint) तैयार करना।
जनता के अधिकार: पंचायत प्रतिनिधियों की जवाबदेही कैसे तय करें?
हम वोट देकर अपना प्रतिनिधि तो चुन लेते हैं, लेकिन अगर वे काम न करें तो क्या करें?
- ग्राम सभा की खुली बैठक: नियम के अनुसार, ग्राम प्रधान को साल में कम से कम दो बार (खरीफ और रबी की फसल कटने के बाद) पूरे गाँव की खुली बैठक बुलानी होती है। इसमें गाँव का कोई भी नागरिक प्रधान से कार्यों और खर्च हुए पैसों का हिसाब मांग सकता है।
- सूचना का अधिकार (RTI): अगर आपको लगता है कि गाँव में खड़ंजे या नाली के निर्माण में भ्रष्टाचार हुआ है, तो आप ‘सूचना का अधिकार अधिनियम’ (RTI Act 2005) के तहत एक सादे कागज़ पर मात्र 10 रुपये का पोस्टल ऑर्डर लगाकर पंचायत सचिव या BDO से खर्च हुए एक-एक रुपये का हिसाब लिखित में मांग सकते हैं।
निष्कर्ष
ग्राम प्रधान गाँव के रोज़मर्रा के विकास का ज़िम्मेदार है, BDC सदस्य ब्लॉक स्तर पर आपकी आवाज़ है, और ज़िला पंचायत सदस्य ज़िले की बड़ी योजनाओं को आपके इलाके तक लाने का माध्यम है। जब हमें इन तीनों के अधिकार और कार्य पता होंगे, तभी हम सही व्यक्ति से सही सवाल कर पाएंगे।
एक जागरूक लोकतंत्र तभी मज़बूत होता है जब उसकी नींव यानी पंचायतें मज़बूत हों। चुनाव में वोट देते समय यह ज़रूर सोचें कि जो व्यक्ति चुनाव लड़ रहा है, क्या वह इन ज़िम्मेदारियों को उठाने के लायक है?
पंचायत चुनाव की निर्वाचन प्रक्रिया (चुनाव कैसे होता है, अधिसूचना से लेकर परिणाम तक) की पूरी और आसान जानकारी के लिए औरैया टाइम्स की अगली पोस्ट का इंतज़ार करें। इस जानकारी को अपने गाँव के हर व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर करें ताकि हर वोटर जागरूक बन सके!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. क्या ग्राम प्रधान अकेले पंचायत का पैसा निकाल सकता है?
उत्तर: नहीं, ग्राम पंचायत के खाते (Gram Panchayat Fund) से कोई भी भुगतान ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव (VDO) दोनों के संयुक्त हस्ताक्षर (Joint Signatures/Dongle) के बिना नहीं हो सकता।
Q2. 11वीं अनुसूची में पंचायतों को कितने कार्य दिए गए हैं?
उत्तर: 73वें संविधान संशोधन के तहत 11वीं अनुसूची में पंचायतों को काम करने के लिए कुल 29 विषय (Subjects) दिए गए हैं।
Q3. BDC और ग्राम प्रधान में क्या अंतर है?
उत्तर: ग्राम प्रधान पूरे गाँव का मुखिया होता है और गाँव का सीधा विकास करता है। जबकि BDC (क्षेत्र पंचायत सदस्य) अपने वार्ड का प्रतिनिधित्व करता है और ब्लॉक स्तर पर ब्लॉक प्रमुख का चुनाव करने और गाँव की समस्याएँ ब्लॉक में उठाने का काम करता है।
Q4. क्या गाँव का कोई आम नागरिक पंचायत के खर्च का हिसाब मांग सकता है?
उत्तर: बिल्कुल। कोई भी नागरिक ग्राम सभा की खुली बैठक में प्रधान से हिसाब मांग सकता है या RTI (सूचना का अधिकार) लगाकर सरकारी खर्च की पूरी जानकारी और बिल-वाउचर की कॉपी प्राप्त कर सकता है।
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