औरैया: जनपद न्यायालय ने न्याय की आस में बैठे एक दलित पीड़ित को 10 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार बड़ी राहत दी है। ऐरवाकटरा थाना क्षेत्र में एक दलित व्यक्ति के साथ हुई बेरहमी से मारपीट और उत्पीड़न के बहुचर्चित मामले में विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) विकास गोस्वामी की अदालत ने एक ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाया है।


न्यायालय ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर इस घटना में शामिल सभी छह अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए 3-3 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 8500-8500 रुपये का भारी अर्थदंड भी लगाया गया है, जिससे दबंगों में कड़ा संदेश गया है।
रास्ते में घेरकर लाठी-डंडों से किया था जानलेवा हमला
इस पूरे आपराधिक घटनाक्रम की शुरुआत करीब एक दशक पहले हुई थी। पीड़ित वादी छोटेलाल कठेरिया (निवासी ग्राम दिलालपुर, थाना ऐरवाकटरा) ने पुलिस में दर्ज कराई गई अपनी रिपोर्ट में बताया था कि वह किसी मामले की सूचना देने के लिए दिलीपपुर पुलिस चौकी की ओर जा रहे थे। तभी रास्ते में गांव के ही विपक्षी सत्येंद्र उर्फ मटकी, आमोद उर्फ भूरा, उपदेश उर्फ छुन्ना, राजेश, रामवीर और बालवीर ने उन्हें बुरी तरह घेर लिया।
आरोप था कि इन सभी ने एकराय होकर लाठी-डंडों और असलाहों से लैस होकर छोटेलाल पर जानलेवा हमला कर दिया और उनके साथ गंभीर रूप से मारपीट व गाली-गलौज की। पुलिस ने वादी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना के बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था।


अधिवक्ता की प्रभावी पैरवी से कोर्ट में साबित हुआ जुर्म : 10 साल बाद दलित को मिला न्याय
इस गंभीर मामले का विचारण जनपद के विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम) विकास गोस्वामी की अदालत में चला। न्याय पाने के लिए पीड़ित छोटेलाल ने जाने-माने अधिवक्ता शिवकुमार अरुण (एडवोकेट) से गुहार लगाई थी। न्यायालय में वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता शिवकुमार अरुण और बचाव पक्ष (अभियुक्तगण) की ओर से सुरेन्द्र कुमार शुक्ला (एडवोकेट) के बीच लंबी और तीखी कानूनी जिरह हुई। अधिवक्ता शिवकुमार अरुण की कुशल, तार्किक और बेहद प्रभावी पैरवी के चलते कोर्ट के सामने दोषियों का जुर्म पूरी तरह से साबित हो गया।
जुर्माना न भरने पर भुगतना होगा अतिरिक्त कारावास
दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध पुख्ता साक्ष्यों का बारीकी से अवलोकन करने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश विकास गोस्वामी ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया। कोर्ट ने भारतीय दंड विधान (IPC) की धारा 34, 147, 148, 149, 323, 504 और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)Vक के तहत सभी 6 अभियुक्तों (सत्येंद्र, आमोद, उपदेश, राजेश, रामवीर और बालवीर) को दोषी माना।
अदालत के सख्त आदेश के अनुसार, सभी दोषियों को तीन-तीन साल की जेल की सजा काटनी होगी और 8500 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से जुर्माना भरना होगा। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि दोषी अर्थदंड की यह राशि अदा नहीं करते हैं, तो उन्हें इसके एवज में अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी पड़ेगी।


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